Ek Shringaar Swabhiman Updated -

'' एक श्रृंगार स्वाभिमान '' विशिष्ट महत्वपूर्ण विषय रहा जो कि हम सबको आत्म-अन्वेषण एवं सशक्तिकरण के तरफ अग्रसर करता रहा। यह हमें अपना विषय में सोचने तथा अपनी पहचान को समझने-बूझने के लिए प्रेरित करे रहा। हमको अनुभव हुआ कि अपनी सौंदर्य एवं अहमियत हमारे श्रृंगार भीतर नहीं केवल रहती, वरन हमारे सोच, कार्यों और स्वभाव अंदर निहित है। ये यात्रा हमें निजी लक्ष्यों तक को प्राप्त करने तथा स्वयं के सपनों रूप को पूर्ण निभाने वास्ते प्रोत्साहित करे थी।

इस सज्जा गर्व: आत्म-परिचय और सक्षमीकरण का प्रवास हमारे परिवार भीतर प्रायः स्त्रियों के जिनकी सुंदरता तथा श्रृंगार के राह से चिन्हित होता है। किंतु क्यों ये वास्तव में इनकी पहचान हो? व वह सिर्फ कोई सामाजिक दबाव था जोकि उनको एक निश्चित प्रकार को जीने के वास्ते बाध्य डालता है? “किसी सज्जा गर्व” इस यात्रा रही जो अपनों को उन प्रश्न के जवाब ढूंढने में सहयोग देती रही और हमें खुद-पहचान तथा सक्षमीकरण की तरफ पहुँचा जाती है। सज्जा: किसी सामाजिक दबाव ek shringaar swabhiman

हर श्रृंगार अभिमान: खुद-की-पहचान और अधिकार-संपन्नता की सफर अपने जनसमाज भीतर अधिकतर स्त्रियों प्रति उनकी खूबसूरती तथा सिंगार के माध्यम से परिभाषित होता है। लेकिन क्या! यह वास्तव रूप उनकी पहचान है? या वह केवल कोई समाजिक तनाव है! जोकि इन्हें निश्चित किसी तरीके से जीवन-यापन के वास्ते बाध्य करवाता है? “वह सज्जा अभिमान” एक वैसी यात्रा है जो हम सब को इन सवालों के उत्तर खोजने में सहयोग करती है तथा हमें खुद-की-पहचान तथा सबलीकरण की दिशा ले जाती है। सज्जा: कोई समाजिक दबाव वह सज्जा अभिमान&rdquo